अल्ताई से होकर चुई राजमार्ग पर सफ़र करते समय रुकने लायक दस जगहें—चिके-तामान दर्रे से शिरलाक जलप्रपात तक।
अगर आप पहली बार अल्ताई जा रहे हैं, तो शरद ऋतु सबसे अच्छा समय है। शरद ऋतु में अल्ताई सुनहरे रंगों से भर जाता है। इन रंगों को न कोई चित्र पूरी तरह दिखा सकता है, न कोई कैमरा। धूसर चट्टानों के बीच क्रिस्टल जैसी फ़िरोज़ी कातुन नदी, पीले बर्च और लार्च के पेड़, चीड़ और देवदार की हरियाली, बर्फ़ से ढकी चोटियाँ—अल्ताई के ये रंग शरद ऋतु में देखने लायक हैं।
इस सुंदरता को देखने के लिए चुई राजमार्ग पर निकलें। यह सदियों पुरानी सड़क दुनिया की दस सबसे खूबसूरत सड़कों में गिनी जाती है। फ़ोन में ढेर सारी जगह खाली रखिए और पोर्टेबल बैटरी साथ ले जाइए।
अब उन जगहों की बात, जहाँ रुककर फिर से तरोताज़ा हो सकते हैं।
1. चिके-तामान दर्रा (659वाँ किमी)
जल्दी आगे मत बढ़िए। बाज़ार पार करके आगे जाएँ—उसके आगे पुराने राजमार्ग के अवशेषों तक जाने वाला रास्ता है, पिछली सदी की एक निशानी। और चोटी से उर्सुल नदी की घाटी दिखती है। यह नज़ारा देखने के लिए पार्किंग से आगे राजमार्ग पर थोड़ा चलें—आपको सफ़ेद फीते बँधे खंभे दिखेंगे। सबसे अच्छी तस्वीरें यहीं आती हैं।
2. कुर-क़ेचु चौकी (680वाँ किमी)
यहाँ इल्गुमेन की तेज़ धाराएँ हैं। कातुन नदी उबलती और झाग छोड़ती है, और अभी उसका रंग सबसे चटख है। रुकिए और दो-एक तस्वीरें लीजिए।
फ़ोटो: Tcapb, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons, चित्र का आकार घटाया गया है
3. ऐरी-ताश के पत्थरीले द्वार (693वाँ किमी)
सीधी खड़ी चट्टानों के बीच एक सँकरी घाटी। माहौल शानदार है और तस्वीरें बहुत अच्छी आती हैं। द्वारों के आगे रुककर झाड़ियों के बीच की छोटी पगडंडी देखिए—यह पुराने खच्चर-मार्ग के अवशेष हैं, आज के राजमार्ग के पूर्वज। उस पर चलिए और ऊपर से कातुन नदी तथा उसकी सीढ़ीनुमा छतों को देखिए।
4. यालोमान मोड़ (696वाँ किमी)
यह मशहूर व्यू-पॉइंट है। नदी यहाँ मोड़ लेती है और ऊपर से नज़ारा देखते ही बनता है। इसके ठीक ऊपर यालोमान का प्राचीन बसाव है, एक मध्ययुगीन क़िला। सिर उठाइए—दीवारों की रूपरेखा दिख जाएगी।
5. चुई और कातुन का संगम (713वाँ किमी)
चुई का सफ़ेद पानी फ़िरोज़ी कातुन में जा मिलता है। यह पवित्र जगह है—कहते हैं यहाँ माँगी गई मुरादें पूरी होती हैं। पहले मोड़ पर बने व्यू-पॉइंट को पार करके राजमार्ग पर थोड़ा नीचे उतरें: वहाँ से नज़ारा बेहतर है।
6. «होराइज़न» तेज़ धारा (716वाँ किमी)
नदी चट्टानों के बीच घिरी है और पानी उबलता है। कमज़ोर दिल वालों के लिए यह दृश्य नहीं, लेकिन सम्मोहित कर देता है।
फ़ोटो: Malupasic, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons, चित्र का आकार घटाया गया है
7. काल्बाक-ताश (723वाँ किमी)
«चित्रित चट्टानें»। हज़ारों प्राचीन चित्र: हिरण, रूनी लिपि के चिह्न, शिकार के दृश्य। समय जैसे थम जाता है। यहाँ किसी की मौजूदगी तीव्रता से महसूस होती है—प्राचीन चित्रकारों की या इस जगह की आत्माओं की।
8. हिरण-पत्थर (728वाँ किमी)
सड़क किनारे पत्थर का योद्धा। वह 2–3 हज़ार साल पुराना है। उस पर चेहरा, एक स्किथियाई ख़ंजर और घोड़े की आकृति उकेरी गई है। पास ही ज़मीनी गिलहरियाँ दौड़ती और छेड़ती हैं, ध्यान मग्न होने नहीं देतीं।
9. कोल्का स्निगिर्योव स्मारक (744वाँ किमी)
रुकिए, पढ़िए और राजमार्ग के चालकों व निर्माणकर्ताओं को श्रद्धांजलि दीजिए। पहाड़ों और मैदान की पृष्ठभूमि में यहाँ की तस्वीरें शानदार आती हैं। और अगर पहाड़ी पर चढ़ें, तो पुराना मोटर-मार्ग और पत्थरों से हाथ से बनाई गई रक्षात्मक दीवार मिलेगा। वहीं मूल निवासियों का स्मारक भी है—वहाँ पाइप थामे एक वृद्ध शमन की प्रतिमा भी है।
10. शिरलाक जलप्रपात, जिसे «कुँवारी के आँसू» भी कहते हैं (759वाँ किमी)
खूबसूरत भी और आसानी से पहुँचा जा सकने वाला भी। घर लौटने से पहले रुकने की बढ़िया आख़िरी जगह।
यह पूरी सूची एक पूरे दिन के सफ़र की है। सुबह निकलें और जल्दी न करें। मेरी सलाह है कि शेबालिनो में रोसनेफ़्ट पेट्रोल स्टेशन पर टंकी पूरी भर लें। और दिन भर के लिए कुछ खाने का सामान साथ रखें।
वलेरिया के चैनल को फ़ॉलो करें «अल्ताई चलें, चलें?»—वहाँ सिर्फ़ जाँची-परखी जगहें और ईमानदार सलाह मिलती है।




टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें
यहाँ अभी कुछ नहीं है। पहले आप लिखें!